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क्या है,  UAPA Bill

आइये जानते है !! UAPA बिल यानी Unlawful Activities Prevention Act 2019 (गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम कानून) देश में आतंकवाद की समस्या को देखते हुए, आतंकी संगठनों और आतंकवादियों की नकेल कसने के लिए UAPA बिल 2019 को मंजूरी दी गई है |

उद्देश्य क्या है ?

ये देश की एकता और अखंडता पर चोट करने वाले के खिलाफ सरकार को असीमित अधिकार देती है | इस बिल का मकसद आतंकवाद की घटनाओं में कमी लाना, आतंकी घटनाओं की स्पीडी जांच करना और आतंकियों को जल्दी सजा दिलवाना है।

गैर-कानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम, 1967
[Unlawful Activities (Prevention) Act, 1967]

  1. यह कानून संविधान के अनुछेद-19 द्वारा प्रदत वाक् व अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, शस्त्रों के बिना एकत्र होने के अधिकार और संघ बनाने के अधिकार पर युक्तियुक्त प्रतिबंध आरोपित करता है।
  2. यह कानून भारत की एकता और संप्रभुता को खतरें में डालने वाली गतिविधियों को रोकने के उद्देश्य से बनाया गया था।
  3. गैर-कानूनी गतिविधियों से तात्पर्य किसी व्यक्ति/संगठन द्वारा देश की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता को भंग करने वाली गतिविधियों को बढ़ावा देती है।
  4. राष्ट्रीय एकता परिषद द्वारा नियुक्त राष्ट्रीय क्षेत्रवाद और एकता पर समिति ने उपरोक्त मौलिक अधिकारों पर प्रतिबंध लगाने का अनुमोदन किया।
  5. इस कानून में पूर्व में भी वर्ष 2004, 2008 और 2012 में संशोधन किया जा चुका है।

गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2019
[Unlawful Activities (Prevention) Amendment Bill, 2019]



UAPA 2019  संशोधन के अहम प्रावधान एंव कड़े नियम

यह विधेयक सरकार को यह अधिकार भी देती है कि इन निम्न आधारों पर किसी को भी व्यक्तिगत तौर पर आतंकवादी या आतंकवादी संगठन घोषित कर सकती है।

  1. आतंकी गतिविधियों में किसी अन्य तरीको एंव माध्यमो से सलंग्न रहना ।
  2. आतंकवाद की तैयारी करना और उसको आगे बढ़ाना।
  3. आतंक से जुड़े किसी भी मामले में उसकी सहभागिता या किसी तरह का अगर कोई कमिटमेंट पाया जाता है तो।
  4. आतंकवाद को बढ़ावा देकर लोगो मे भय का माहौल बनाना।

राष्ट्रीय जांच एजेंसी के अधिकारों में बढोतरी होगी :-

नए प्रस्तावित संशोधनों के बाद अब यह विधेयक राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को भी असीमित अधिकार देता है । पहले के नियम के मुताबिक एक जांच अधिकारी को आतंकवाद से जुड़े किसी भी मुद्दों में संपत्ति सीज करने के लिए पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) से अनुमति लेनी होती थी | लेकिन अब यह विधेयक इस बात की अनुमति देता है कि अगर आतंकवाद से जुड़े किसी मामले की जांच NIA का कोई अफसर करता है, तो उसे इसके लिए सिर्फ एनआईए के महानिदेशक से अनुमति लेनी होगी।

परन्तु संशोधन के बाद अब आतंकी गतिविधियों में शक के आधार पर लोगों को उठा सकेगी, साथ ही संगठनों को आतंकी संगठन घोषित कर उन पर कार्रवाई कर सकती है साथ ही जांच के लिए एनआईए को पहले संबंधित राज्य की पुलिस से अनुमति लेना पड़ती थी, लेकिन अब इसकी जरूरत नहीं पड़ेगी।

सहकारी संघवाद के बारे में जानकारी

UAPA विधयेक के लाभ :-

1.आतंकी गतिविधियों में किसी भी तरह से शामिल व्यक्ति और संस्थाओं को आतंकी घोषित कर सकती है।

2. देश मे बढ़ रहे आतंकवादी संगठनों एंव गतिविधियों को खत्म करने के लिये यह कारगर तरीका है।

3. NIA की पावर बढ़ेगी अब इंस्पेक्टर रैंक या उससे बड़ी रैंक के अधिकारी भी इन मामलो में जांच पड़ताल कर सकेंगे लेकिन पहले उन्हें डायरेक्टर जनरल से अनुमति लेनी होगी।

4. NIA को संपत्तियों को कब्जा और उनकी कुर्की करने का अधिकार मिल जाएगा, जिनका आतंकी गतिविधियों में इस्तेमाल होता था।

5. आतंकवादियों की आर्थिक और वैचारिक मदद करने वालों और आतंकवाद के सिद्धांत का प्रचार करने वालों को आतंकवादी घोषित किया जा सकेगा।


UAPA विधेयक से होने वाली हानियां:-

1. एनआईए की मनमानी बढ़ सकती है और सरकार विरोधी लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।

2. ऐसे में धरपकड़ बढ़ेगी ओर केवल शक के आधार पर किसी भी व्यक्ति को पकड़ा जा सकता है।

3. इस संशोधन में आतंकवाद की निश्चित परिभाषा नहीं दी गयी है , इसका नकारात्मक प्रभाव यह होगा कि सरकार व कार्यान्वयन एजेंसी आतंकवाद की मनमानी व्याख्या द्वारा किसी को भी प्रताड़ित कर सकते हैं।

4. यह विधेयक न्यायिक प्रक्रिया का पालन किये बिना आतंकी घोषित करने का अधिकार देता है, जिससे भविष्य में राजनैतिक दुर्भावना के आधार पर दुरूपयोग की आशंका बढ़ सकती है।

5. NIA संपत्ति को जब्त करने का अधिकार रखती है लेकिन पुलिस राज्य का विषय है।

UAPA विधेयक का गलत इस्तेमाल होने पर यह प्रावधान है

1.केंद्र सरकार इस एक्ट के मुताबिक एक रिव्यू कमिटी बना सकती है. जिसके सामने आतंकी घोषित संगठन या व्यक्ति अपील कर सकता है और वहां सुनवाई की गुजारिश कर सकता है।

2.हमंत्रालय की ओर से कहा गया है कि अगर किसी व्यक्ति को आंतकी घोषित किया जाता है तो वो गृहसचिव के सामने अपील कर सकता है. गृह सचिव को 45 दिन के भीतर अपील पर फैसला लेना होगा.

3. अगर कोई व्यक्ति गृह सचिव के फैसले से संतुष्ट नहीं हो तो वो कमिटी में अपील कर सकता है. कमिटी में हाईकोर्ट के सीटिंग या रिटायर्ड जज के साथ कम से कम केंद्र सरकार के दो गृहसचिव रैंक के रिटायर्ड अधिकारी होंगे.

https://mha.gov.in/commoncontent/notifications-under-unlawful-activities-prevention-act-uapa-1967

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