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क्या है आरटीआई एक्ट 2005 में संशोधन ?

आरटीआई एक्ट 2005 [RTI- Right to information]

जुलाई 2019 में दो महत्वपूर्ण बदलाव इस संशोधन के तहत किये गए जो है-

Right to information act 2019 amendment केंद्रीय मुख्य सूचना आयुक्त और अन्य सूचना आयुक्तों की नियुक्ति  पहले 5 साल के लिए या उम्र 65 साल होने तक होती थी, इस संशोधन के बाद आयुक्तों का कार्यकाल केंद्र सरकार द्वारा तय किया जाएगा ।

 केंद्रीय मुख्य सूचना आयुक्त का वेतनमान, भत्ता और अन्य सेवा शर्ते पहले मुख्य चुनाव आयुक्त के बराबर थी परन्तु अब इसका निर्धारण केंद्र सरकार द्वारा किया जाएगा । अन्य सूचना आयुक्त का वेतन भत्ता और सेवा शर्ते  भी अन्य चुनाव आयुक्त के बराबर थी परन्तु अब इसका निर्धारण केंद्र सरकार द्वारा किया जाएगा ।

 

R.T.I. ( Right To Information Act 2005 )

इतिहास

स्वतंत्रता से पूर्व, शासकीय गोपनीयता अधिनियम 1923 के तहत सरकार को किसी भी सूचना को गोपनीय रखने का अधिकार था। तथा संविधान में भी सूचना के अधिकार के संबंध में कोई चर्चा नहीं की गई, वरन सूचना के अधिकार के प्रति सजगता साल 1975 में  उत्तर प्रदेश सरकार बनाम राज नारायण केस से आई तब सर्वोच्च न्यायालय ने आदेश दिया की लोक प्राधिकरण द्वारा सार्वजनिक कार्यों का दौरा जनता को दिया जाए तथा अनुच्छेद 19(a) के दायरे को बढ़ाकर उसमें सूचना का अधिकार को शामिल किया गया

Right to information act 2019 amendment

            1997 में एच.डी. सॉरी की अध्यक्षता में समिति गठित की गई, समिति ने सूचना की स्वतंत्रता का प्रारूप प्रस्तुत किया जो  1997 में हुए मुख्यमंत्रियों के सम्मेलन में स्वीकार किया गया, तमिलनाडु ने सबसे पहले 1997 में सूचना का अधिकार कानून पास किया ।  2002 में सूचना की स्वतंत्रता विधेयक पारित हुआ, जिसे जनवरी 2003 में राष्ट्रपति की मंजूरी प्राप्त हुई । 2005 में अन्ना हजारे के आन्दोलन के कारण  मनमोहन सिंह की सरकार ने आर.टी.आई. एक्ट पारित किया,  2005 से जम्मू कश्मीर को छोड़कर पूरे देश में लागू हुआ । 2019 में हुए संशोधन ने आरटीआई को फिर चर्चा का विषय बना दिया ।  

आरटीआई एक्ट 2005

Right to information act 2019 amendment

आरटीआई एक्ट 2005 के तहत सूचना लेने के क्षेत्र –

  1. ऐसी जानकारी जिसे संसद या विधान मंडल सदस्यों को देने से इनकार नहीं किया जा सकता,  उसे किसी आम व्यक्ति को देने से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
  2. सिर्फ भारतीय नागरिक ही इस कानून का फायदा ले सकते हैं। 
  3.  सरकारी महकमें में ए क्या ज्यादा अधिकारियों को पब्लिक इंफॉर्मेशन ऑफिसर के रूप में अपोइन्ट  कराना जरूरी है। 
  4. पब्लिक अपनी इंफॉर्मेशन किसी भी रूप में मांग सकती है। 
  5.  रिटेंशन पीरियड तक की सूचना मांगी जा सकती है। 
  6.  आरटीआई की फीस ₹10 है और बीपीएल वालों के लिए फ्री है। 
  7. आरटीआई एक्ट 2005 की फीस कैश, डिमांड ड्राफ्ट या फिर पोस्टल आर्डर द्वारा दी जा सकती है। 
  8.  आईटीआई की अंतर्गत मांगी गई इंफॉर्मेशन के लिए 30 दिन का फिक्स टाइम दिया जाता है। 
  9.  30 दिन के बाद आपको बिना फीस के सारे इंफॉर्मेशन दी जाती है। 
  10.  आरटीआई एक्ट 2005 के दायरे में आने वाले सभी विभागों से आप जानकारी ले सकते हैं।  जैसे- राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री दफ्तर, संसद, बिरहा विधानसभा, चुनाव आयोग, सभी अदालतें, तमाम सरकारी दफ्तर, सभी सरकारी बैंक, सारे सरकारी अस्पताल, पुलिस महकमा, सेना के तीनों अंग, पीएसयू सरकारी बीमा कंपनियां, स्कूल, कॉलेज, आदि। 

आरटीआई एक्ट 2005 के तहत सूचना किन क्षेत्र में नहीं ली जा सकती ?

  1. थर्ड पार्टी यानी निजी संस्थानों संबंधित जानकारी।  
  2. दूसरे देशों के साथ भारत से जुड़े मामले। 
  3.  जिनके सार्वजनिक होने से देश की सुरक्षा और अखंडता को खतरा हो।



right to information के लिए एप्लिकेशन कैसे लिखें ?

सूचना पाने के लिए कोई प्रोफार्मा नहीं है।  सादे कागज पर हाथ से लिखकर या टाइप कराकर ₹10 की फीस के साथ अपनी एप्लीकेशन संबंधित अधिकारी के पास जमा कर सकते हैं।  आवेदक को सूचना मांगने के लिए कोई वजह या पर्सनल गोरा देने की जरूरत नहीं। उसे सिर्फ अपना पता देना होगा। 

 आरटीआई के तहत इंफॉर्मेशन देने को कब मना किया जा सकता है ?

  1.  एप्लीकेशन किसी दूसरे जन सूचना अधिकारी या पब्लिक अथॉरिटी के नाम पर हो। 
  2.  आप ठीक तरह से सही फीस का भुगतान ना कर पाए हो। 
  3.  आप गरीबी रेखा जुड़े सर्टिफिकेट की फोटो कॉपी ना दे पाए हो। 
  4.  सरकारी विभाग के संसाधनों का गलत इस्तेमाल होने की आशंका हो। 

 अगर कोई अधिकारी आपको सूचना देने से मना करता है या फिर जानबूझकर देरी करता है या तथ्य छुपाने की कोशिश करता है तो उसके लिए आप अपील कर सकते हैं,  और ऐसा करने पर संबंधित अधिकारी पर प्रतिदिन के अनुसार ₹250 के अनुसार ₹25000 तक जुर्माना लगाया जा सकता है।  [आरटीआई एक्ट 2005]

अपील का अधिकार –

1. आवेदक प्रथम अपीलीय अधिकारी के सामने अपील कर सकता है। 

2. प्रथम अपील के लिए कोई फीस नहीं देनी होगी। 

3. ऐसी अपील जन सूचना अधिकारी का जवाब मिलने की तारीख से 30 दिन के अंदर की जा सकती है। 

4. अपीलीय अधिकारी को 30 दिन के अंदर या खास मामले में 45 दिन के अंदर अपील का निपटन करना जरूरी है। 

5. अगर आपको पहली अपील दाखिल करने के 45 दिन के अंदर जवाब नहीं मिलता तो आप 45 दिन के अंदर राज्य के स्टेट इनफार्मेशन कमीशन से या केंद्रीय प्राधिकरण के लिए सेंट्रल इनफॉरमेशन कमिशन के पास दूसरी अपील दाखिल कर सकते हैं।

 

official E-portal For Right to information – https://rtionline.gov.in/ 

to know about UAPA bill Amendment click on it- https://mebhiadhikari.com/uapa-bill/

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