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स्वास्थ्य

Mid day meal scheme (मिड डे मील)

Mid day meal scheme (मिड डे मील)-
प्रारंभ-   15 अगस्त 1995
उद्देश्य

  • प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक कक्षाओं के बच्चों को गर्म और पका हुआ खाना उपलब्ध कराना |
  • विद्यालयों में छात्रों के नामांकन में वृद्धि तथा छात्रों को स्कूल आने के लिए प्रोत्साहित करना |
  • प्राथमिक शिक्षा के सार्वजनिकरण को बढ़ावा देना |
  • स्कूल ड्रॉप- आउट को रोकना |
  • बच्चों के पोषण स्थिति में वृद्धि तथा सीखने के स्तर को बढ़ावा देना |
  • गर्मी की छुट्टियों के दौरान सूखा प्रभावित क्षेत्रों में बच्चों को पोषण सहायता प्रदान करना |

कार्यक्षेत्र-   यह योजना सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों विशेष प्रशिक्षण केंद्रों और सर्व शिक्षा अभियान के अंतर्गत आने वाले मदरसों में संचालित की जा रही है |

प्रावधान-   योजना के तहत निम्न  प्राथमिक स्तर के लिए प्रतिदिन न्यूनतम 450 केलोरी ऊर्जा और 12 ग्राम प्रोटीन तथा उच्च प्राथमिक स्तर के लिए न्यूनतम 700 कैलोरी ऊर्जा और 20 ग्राम प्रोटीन देने का प्रावधान |

योजना का केंद्र- राज्य में खर्च वहन अनुपात-

गैर-  पूर्वोत्तर राज्यों और विधानसभा वाले केंद्र शासित प्रदेशों में 60:40

केंद्र शासित प्रदेशों में शत-प्रतिशत केंद्र द्वारा वित्तपोषित

पूर्वोत्तर राज्यों और हिमाचल प्रदेश, जम्मू – कश्मीर  और उत्तराखंड के तीन हिमालयी राज्यों में 90:10

मानव संसाधन विकास मंत्रालय करता है योजना का क्रियान्वयन |
प्रमुख बिंदु-
राष्ट्र की भावी पीढ़ी के पोषण एवं विकास से जुड़ा हुआ बहुद्देशीय कार्यक्रम |
2408 ब्लॉकों में प्रारंभिक शिक्षा के लिए शुरू किया गया था |
सितंबर 2004 में पका हुआ गर्म भोजन देने की व्यवस्था प्रारंभ |
विश्व की सबसे बड़ी विद्यालयी  भोजन योजना है मिड डे मील |
इसमें पहले से ही आठवीं कक्षा के सभी बच्चों को दोपहर का भोजन दिया जाता है मुफ्त |
मिड डे मील नियम 2015 राष्ट्रीय खाद सुरक्षा अधिनियम 2013 के अंतर्गत अधिसूचित |
इस स्कीम की गाइडलाइन के मुताबिक केंद्रीकृत मॉडल के तहत स्थानीय रसोइयों और हेल्पर द्वारा स्कूल में ही भोजन  पकाया जाता है |
विकेंद्रीकृत मॉडल के तहत सिविल या गैर- सरकारी संगठन द्वारा खाना बनाया जाता है इस  खाने को फिर स्कूलों में भेजा जाता है |
एक गैर- सरकारी संगठन अक्षय पात्र फाउंडेशन मिड डे मील योजना के क्रियान्वयन में सरकार के प्रमुख भागीदारों में से एक है, जो छात्रों को दैनिक आधार पर भोजन वितरित करता है |

आशा (ASHA) कार्यक्रम

शुभारंभ– वर्ष 2005 से,

पूरा नाम-(Accredited social health activist ASHA)

 

कार्यप्रणाली-

  • राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन का प्रमुख घटक- देश के प्रत्येक गांव में आशा कार्यकर्ता के रूप में 1% 
  • महिला की नियुक्ति है |
  • इस आशा कार्यकर्ता महिला का चयन उसी गांव से किया जाता है और उसी गांव को वह सेवा प्रदान करती है | 
  • आशा स्वास्थ्य कर्मी की उम्र 25 से 45 वर्ष एवं दसवीं कक्षा उत्तर इन हो का चयन किया जाता है |
  • आशा कर्मी गांव में महिलाओं को संस्थागत प्रसव, प्रतिरक्षण, रोग, नियंत्रण, कार्यक्रम, स्तनपान एवं शिशु बच्चों के स्वास्थ्य के देखभाल हेतु प्रोत्साहन एवं सरकार की योजना की जानकारी एवं क्रियान्वयन मैं सहयोग करती है |
  •  आशा कार्यकर्ता को प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है |
  • महिलाओं और बच्चों पर ध्यान देते हुए विशेष आबादी के कमजोर वर्गों के लोगों  के लिए समुदाय मैं आशा को प्रथम सहयोगी के रूप में माना जाता है |
  •  अधिकांश राज्यों ने प्रशिक्षण कार्यस्थल पर अनुभवी परामर्शदाता और निष्पादन मॉनिटरिंग की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए आशा हेतु सक्रिय प्रशिक्षण और सहायक प्रणाली की व्यवस्था की है | 

आयुष्मान योजना

नोडल एजेंसी-  राष्ट्रीय स्तर- राष्ट्रीय स्वास्थ्य संरक्षण मिशन एजेंसी(National Health Protection Mission Agenul-NHPMA)

राज्य स्तर- राज्य स्वास्थ्य एजेंसी(State Health Agenul-SHA)

 

 उद्देश्य-

      1.  स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियों से समग्र रूप से निपटना

  1. इसके कार्यक्रमों द्वारा प्राथमिक,  द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्रों में स्वास्थ्य को बेहतर बनाना |
  2.   40% जनसंख्या( विशेषत: गरीब ) को स्वास्थ्य सुरक्षा के दायरे में लाना |

 

 घटक–   वर्तमान में संचालित’’ स्वास्थ्य एवं देखभाल केंद्र’’ और राष्ट्रीय स्वास्थ्य संरक्षण योजना’’ इसमें शामिल है |

 स्वास्थ्य एवं देखभाल केंद्र-  1. राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 में स्वास्थ्य और आरोग्य केंद्रों की परिकल्पना  2. इस पहल द्वारा 1.5 लाख स्वास्थ्य केंद्र देखरेख प्रणाली’’ लोगों को सुलभ कराए जाएंगे |

  1. स्वास्थ्य केंद्रों द्वारा  मातृत्व एवं बाल स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाएगी |
  2. स्थापित केंद्रों पर निशुल्क दवाइयां और वैधानिक सेवा भी उपलब्ध होगी |
  3. इस पहल के लिए 12 सौ करोड़ रुपए का प्रावधानकिया गया
  4. केंद्रों की स्थापना के लिए  सी॰एस॰आर (Corporate Social responsiblity) और  लोको उपकारी संस्थाओं के माध्यम से निजी क्षेत्रों को आमंत्रित करने का प्रावधान |

राष्ट्रीय स्वास्थ्य संरक्षण योजना

  1. पहल द्वारा 10 करोड से अधिक गरीब परिवारों  के लगभग 50 करोड़ लाभार्थी को लाभ
  2. सभी द्वितीयक और तृतीयक श्रेणी के अस्पताल शामिल
  3. पहल द्वारा द्वितीयक और तृतीयक देखरेख अस्पताल में भर्ती होने के लिए प्रति परिवार 5 लाख तक का कवरेज प्रदान

 

 संभावित लाभ-  

  1. इन दोनों पहलो  के माध्यम से नए भारत वर्ष 2022 का निर्माण संभव
  2. इन नवीन स्वास्थ्य पहलो  द्वारा महिलाओं के लिए रोजगार के नवीन अवसर का सृजन संभव
  3. स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश
  4. रिमोट एरिया के लोगों की स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच 
  5. रिमोट एरिया जो शहरी क्षेत्रों से बहुत दूर और अधिक आबादी वाले बस्तियों से अलग
  6. शुरुआती दौर में बीमारियों की पहचान संभव
  7. स्वास्थ्य सुविधाएं केस लेस एवं पोर्टेबल

मिशन इंद्रधनुष

  1. प्रारंभ दिनांक-   25 सितंबर 2014

     

    परिचय-

           1. नोडल मंत्रालय-   स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय

    1. प्रारंभिक चरण में शादी के ( डिप्थीरिया, काली खांसी, टिटनेस, टीवी,  पोलियो, हेपेटाइटिस बी, और खसरा)
    2. कुछ अन्य टीके जैसे- जापानी इंसेफेलाइटिस, हिमोफिलस, इनफ्लुएंजा टाइप बी (HIB),  रोटावायरस बाद में शामिल किए गए |

     लक्ष्य-

    1.  मिशन द्वारा सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम ( यूआईपी)  के तहत 2 साल तक के बच्चों और गर्भवती महिलाओं का संपूर्ण                टीकाकरण

    2. 2020 तक सभी बच्चों एवं गर्भवती महिलाओं को शामिल करते हुए 90% तक टीकाकरण

     

    इंटेंसिफाइड मिशन इंद्रधनुष (IMI)-

    1. 90% टीकाकरण के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए चुनिंदा जिलों और शहरी इलाकों में I.M.I की शुरुआत की गई|
    2. दिसंबर 2018 तक इस मिशन को पूरा करने का लक्ष्य है |
    3. आई.एम.आई द्वारा 2 वर्ष तक के बच्चों और नियमित टीकाकरण ना कराने वाली गर्भवती महिलाओं के टीकाकरण का लक्ष्य है|
    4. जरूरत के अनुसार इसमें 5 वर्ष तक के बच्चों को भी शामिल करने का प्रावधान है |

दीनदयाल चलित अस्पताल योजना

प्रारंभ -25सितंबर वर्ष 2004 से

    उद्देश्य– राज्य सरकार द्वारा मध्य प्रदेश के सुदूर आदिवासी क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना|

 

 योजना क्रियान्वयन की प्रक्रिया–  इस योजना के तहत एक चलित वाहन का निर्माण कराया गया है, जिसमें डॉक्टर, स्टाफ, जरूरी उपकरण एवं दवाइयां उपलब्ध है यह चलित वाहन आदिवासी क्षेत्र के ग्रामों एवं हाट  बाजारों में सभी वर्ग के लोगों को निशुल्क स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराता है|

 दीनदयाल चलित अस्पताल योजना के अंतर्गत निम्नांकित स्वास्थ्य सेवाएं निशुल्क उपलब्ध कराई जाती है-

  1. चिकित्सकीय  परामर्श, प्राथमिक उपचार, प्राथमिक जांच व निशुल्क दवा वितरण |
  2. प्रसव पूर्व एवं प्रसव उपरांत स्वास्थ्य परीक्षण व आवश्यक दवाइयों का वितरण |
  3. मलेरिया व टी॰ बीजांच के लिए रक्त एवं खखार पट्टी संग्रह |
  4. जटिल स्वास्थ्य संबंधित उपकरणों की पहचान व आवश्यक उपचार के लिए शासकीय चिकित्सा संस्थाओं में मरीजों को रिफर करना |
  5. टीकाकरण |
  6. परिवार नियोजन के विभिन्न माध्यमों के संबंध में जानकारी |
  7. विभिन्न जनकल्याणकारी कार्यक्रमों का  प्रचार- प्रसार करना, स्वास्थ्य संबंधित परामर्श |

 

 संपर्क–  चलित अस्पताल द्वारा संबंधित जिले के मुख्य चिकित्सा व स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा नियत मार्ग व स्थान पर प्रातः 10:00 बजे से शाम 6:00 बजे तक सेवाएं उपलब्ध कराई जाएगी  |

विजया राजे जननी कल्याण बीमा योजना

 उद्देश्य–  प्रदेश में संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए विजयाराजे जननी कल्याण  बीमा योजना प्रारंभ की गई है | इस योजना में गर्भवती महिलाओं को प्रसव के समय इलाज पर होने वाले खर्च के रूप में राशि 1000 रुपए का भुगतान किया जाएगा | इस योजना के माध्यम से परिवार पर प्रसव के दौरान आने वाले खर्च के भार से परिवार को राहत मिलेगी, साथ ही महिलाओं में नियमित प्रसव पूर्व जांच के बारे में बेहतर जागृति भी उत्पन्न होगी |

 

 पात्र-  इस योजना के अंतर्गत गरीबी रेखा के नीचे जीवनयापन करने वाले समस्त परिवार की गर्भवती महिलाओं को प्रसव के समय योजना का लाभ मिलेगा | 

 

योजना का स्वरूप एवं कार्यक्षेत्र-   इस योजना का लाभ पात्र महिलाओं को प्रसव के दौरान चिकित्सकीय  व्यय की प्रतिपूर्ति के रूप में रुपए 1000 और प्रसव के दौरान मृत्यु होने पर उसके उत्तराधिकारियो को  बीमित राशि के भुगतान के रूप में रुपए 50,000 की राशि दी जाएगी |

 इस योजना का लाभ तभी दिया जाएगा जब संबंधित महिला की 3 प्रसव पूर्व जांच कराई गई हो और प्रसव सरकारी अस्पताल में अथवा चिन्हित निजी अस्पताल में हुआ हो |

 किसी अन्य कारण से होने वाली मृत्यु जैसे दुर्घटना एवं अन्य बीमारी से मृत्यु मैं इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा  यदि किसी महिला का प्रसव निजी अस्पताल में होता है, तो उस परिस्थिति में इस बीमा योजना का लाभ उन्हें अस्पतालों के माध्यम से दिया जा सकेगा,  जो स्थानीय स्तर पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी से संबद्धता प्राप्त है सामान्य प्रसव के लिए दर किसी भी स्थिति में रुपए 1000 से अधिक नहीं होगी |पात्र महिलाओं का दवा फार्म एवं समस्त अभिलेख पूर्ण कराने की जिम्मेदारी अस्पताल प्रभारी की होगी अस्पताल प्रभारी ही दवा स्वीकृति कराने का अधिकारी होगा और बीमा कंपनी से समन्वय स्थापित कर समस्त भुगतान कराने का दायित्व मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी का होगा यह भुगतान जननी सुरक्षा योजना के अतिरिक्त दिया जाएगा |