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कृषि

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY)

मंजूरी-       13 जनवरी 2016

  शुभारंभ-        18 फरवरी 2016 ( शेरपुर, सीहोर, मध्यप्रदेश से पी एम द्वारा)

  क्रियान्वयन-         केंद्रीय कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्रालय द्वारा |

 

 उद्देश्य-   विभिन्न आपदाओं के समय किसानों को फसल नुकसान की भरपाई करना |

 विशेष-   इसी योजना ने पूर्वर्ती राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना का स्थान लिया है |

 

 कार्यप्रणाली-   इस योजना अंतर्गत सभी प्रकार की फसलें ( रबी, खरीफ़, वाणिज्यिक और बागवानी फसलों को शामिल किया गया है |

  1. खरीफ फसलों के लिए 2% प्रीमियम भुगतान |
  2.   रबी फसलों के लिए 1.5 प्रतिशत प्रीमियम भुगतान |
  3.   वाणिज्यक / बागवानी फसलों के लिए 5% प्रीमियम भुगतान |

–  इस योजना के तहत प्राकृतिक आपदा के तुरंत बाद 25% क्लेम सीधा किसानों के बैंक खातों में पहुंचेगा ,शेष फसल आकलन के बाद

–   थीम :  ” एक राष्ट्रीय एक योजना”

राष्ट्रीय कृषि बाजार ई- नाम' योजना

शुभारंभ-     14 अप्रैल 2016

 उद्देश्य-    कृषि बाजार को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म प्रदान कर देश की समस्त मंडियों को आपस में जोड़ना|

 क्रियान्वयन-  ई – नाम परियोजना एक ऑनलाइन पोर्टल द्वारा संचालित होगी जिसे राज्य की मंडियों से जोड़ा जा रहा है|  इसका सॉफ्टवेयर सभी इच्छुक राज्यों को निशुल्क दिया गया है और कामकाज में मदद के हर भागीदारी मंडी में 1 वर्ष के लिए जानकर व्यक्ति को नियुक्त किया जा रहा है इस  परियोजना के तहत भारत सरकार राज्यों की प्रस्तावित मंडी को 30 लाख रुपए का अनुदान दे रही है |

–  इस पोर्टल से संबंधित जानकारी प्राप्त करने के लिए किसानों को 24 घंटे किसान हेल्पलाइन सेवा उपलब्ध होगी |

–  मार्च 2018 तक इसमें 585 मंडियों को जोड़ दिया जाएगा |

 लाभ – 

1. कृषको को तकनीकी शिक्षा का ज्ञान होना |

2.फसल  क्रय- विक्रय  एकीकृत व्यवस्था का निर्माण होना |

3.समय की बचत तथा व्यवस्था में सुधार आना |

मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना

  शुभारंभ –   19 फरवरी 2015 ( सूरतगढ़ जिला, गंगानगर राजस्थान में पी एम द्वारा )

 उद्देश्य-   भारत के कृषि क्षेत्र की मिट्टी को पोषकता  का परीक्षण एवं गुणकता सुधार करना |

 विशेष-   इसके अंतर्गत कृषक को भूमि की मिट्टी परीक्षण हेतु एक मैदा कार्ड जारी किया जाएगा जिससे उर्वरक एवं उत्पादकता का परीक्षण कर आवश्यक पोषक उपाय  किए जा सके |

किसान क्रेडिट कार्ड योजना

शुभारंभ-   वर्ष 1998-99  अगस्त |

 उद्देश्य-   सभी पात्र किसानों को उनके कृषि कार्यों के लिए परेशानी मुक्त और समय पर ऋण प्रदान करने के लिए |

 क्रियान्वयन-  

  • सीमांत किसान बटाईदार, मौखिक  पट्टेदाल और काश्तकार किसान इस योजना का लाभ प्राप्त करेंगे |
  • क्रेडिट कार्ड (kcc)  की वैधता – 5 वर्ष |
  • इस योजना का प्रमुख उद्देश्य फसल बुवाई, कटाई के बाद के खर्च के लिए अल्पावधि ऋण देना, घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए ऋण देना |
  •  कृषि परिसंपत्ति और गतिविधियों जैसे डेरी, पशु, अंतर्देशीय, मत्स्य आदि के रखरखाव के लिए कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराना और कृषि से जुड़ी जरूरतो  
  •                                                         जैसे-  पंप सेट,  स्प्रेयर, डेयरी पशुओं आदि के लिए निवेश ऋण उपलब्ध कराना |
  • KCC स्मार्ट कार्ड सहित डेबिट कार्ड में  बदला जा सकता है जिसमें ATM के माध्यम से भी उसका उपयोग किया जा सकता है |
  • नाबार्ड व Reserve bank of india /रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने मिलकर इसे शुरू किया था |
  • KCC  के तहत किसान 5 साल में तीन लाख तक  का अल्पकालीन लोन ले सकता है |

यंत्रदूत ग्राम योजना

उद्देश्य – कृषि के यंत्रीकरण द्वारा उत्पादन में वृद्धि करना है| इसके लिए कुछ विशेष चयनित ग्रामों को यंत्रदूत ग्राम के रूप में  चयनित किया जाता है ताकि यह अन्य क्षेत्रों के लिए उदाहरण बन सके |

– इस योजना के क्रियान्वयन  हेतु प्रदेश के सभी 51 जिलों से  एक एक ग्राम के नाम से कुल 50 यंत्रदूत  ग्राम चिन्हित किए गए हैं |

–  यंत्रीकृत  कृषि के प्रति कृषक को में जागरूकता बढ़ाने के लिए वर्ष 2010-11  वह 2011-12 मैं 25- 25 यंत्रदूत ग्राम चयनित किया गए इस प्रकार अब प्रत्येक जिले में एक गांव यंत्रदूत गांव के मॉडल के रूप में उपलब्ध रहेगा |

– नवीन  कृषि यंत्रों के उपयोग से इन ग्रामों की कृषि उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है|  कुछ मामलों में तो यह वृद्धि 50% तक भी देखी गई है| संसाधनों का संरक्षण व कृषि कार्यों में लोगों का सशक्तिकरण इसके अन्य  लाभ हैं |

–  मध्य प्रदेश की इस योजना को भारत सरकार के कृषि मंत्रालय ने भी महत्व दिया है और 12वीं पंचवर्षीय योजना( 2012-17)  की अवधि हेतु कृषि यंत्रीकरण पर राष्ट्रीय मिशन (National mission on agriculture mechanisation (NMAM) ) का आरंभ किया है |

आचार्य विद्यासागर गौ संवर्धन योजना

 शुभारंभ–  वर्ष 2015- 16

उद्देश्य–  प्रदेश में दुग्ध उत्पादन में वृद्धि |

  •  हितग्राहियों के आर्थिक स्थिति में सुधार लाना |
  •  पशुओं की दुग्ध उत्पादन क्षमता में वृद्धि |
  •  रोजगार के अवसर प्रदाय करना |

 

पात्र हितग्राही –  सभी

 योजना  कार्यान्वयन–  हितग्राही के पास पांच पशुओं हेतु न्यूनतम 1 एकड़ कृषि भूमि होना आवश्यक है तथा पशुओं की संख्या में वृद्धि भूमि का निर्धारण किया जाएगा |

 मिलट  रूट में क्रियान्वयन को प्राथमिकता –

  योजना इकाई लागत-  पशुपालन न्यूनतम 5 या इससे अधिक पशु की योजना स्वीकृत करा सकेगा तथा परियोजना की अधिकतम सीमा राशि 10 लाख रुपए तक होगी |

 परियोजना लागत का 75% राशि बैंक ऋण के माध्यम से प्राप्त करनी होगी तथा शेष राशि की व्यवस्था मार्जिन मनी सहायता एवं हितग्राही का स्वयं के अंशदान के रूप में करनी होगी |

 

ई- उपार्जन योजना

 शुभारंभ   – 2012- 13 से

 उद्देश्य–  प्रदेश के गेहूं, धान एवं मोटे अनाज के कृषकों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाना एवं उपार्जन से बिचौलियों को दूर रखना |

परियोजना का स्वरूप–  ई- परियोजना अंतर्गत किसानों का पंजीयन जिसमें उनके द्वारा फसल के  बोए गए रब्बे की जानकारी, मोबाइल नंबर एवं बैंक खाते की जानकारी प्राप्त कर किसानों को पंजीयन की रसीद दी जाती है |

 किसान द्वारा विक्रय किए गए फसल की राशि का भुगतान सात दिवस के भीतर दिए गए खाते में सीधे बैंक हस्तांतरण प्रणाली से की जाती है |

–  खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के अंतर्गत इस योजना की समस्त कार्यवाही सुनिश्चित होती है|