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चन्द्रयान 2

(in this blog we know about chandrayaan 2 all basic information, aim, amazing fact, benefits etc.)

चंद्रयान-२ , चंद्रयान-1 के बाद भारत का दूसरा चन्द्र अन्वेषण अभियान है, इस अभियान में भारत में निर्मित एक चंद्र कक्षयान, एक रोवर एवं एक लैंडर शामिल हैं । अभियान को जीएसएलवी संस्करण 3 प्रक्षेपण यान द्वारा प्रक्षेपित किया गया जिसे भारतीय अंतरिक्ष अनुसन्धान संगठन (इसरो) ने विकसित किया है ।

चन्द्रयान का उद्देश्य(chandrayaan 2 aim) :-

1. चंद्रयान -2 के उद्देश्य चंद्र की दक्षिणी ध्रुव की सतह पर नरम-भूमि की क्षमता का प्रदर्शन करना और सतह पर एक रोबोट रोवर संचालित करना है।

2. वैज्ञानिक लक्ष्यों में चंद्रमा की भौगोलिक उच्चावच, खनिजिय क्षमता , तात्विक प्रचुरता के बारे में जानकारी एकत्रित करना  शामिल हैं ।

3. दक्षिण ध्रुवीय क्षेत्र में पानी की उपस्थिति का पता लगाना भी शामिल है ।

4. ऑर्बिटर चंद्र सतह को मैप करेगा और इसके 3 डी मैप तैयार करने में मदद करेगा।

सूचना के अधिकार संबधित जानकारी


चन्द्रयान भौतिक स्वरूप chandrayaan 2 all basic information :-

ऑपरेटर :- भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO)

उत्पादक:- भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO)

शक्ति:- ऑर्बिटर: 1 kW
विक्रम लैंडर: 650 डब्ल्यू
प्रज्ञान रोवर: 50 डब्ल्यू

राकेट:- जीएसएलवी एमके ।।। {बाहुबली}

कब एंव कहां से हुआ लांच :-

चेन्नई से लगभग 100 किलोमीटर दूर सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र में दूसरे लांच पैड से चंद्रयान-2 का प्रक्षेपण 22 जुलाई 02:43 अपराह्न कर दिया गया था । जिसके फलस्वरूप इस यान को निर्धारित समय पर सफलता पूर्वक प्रक्षेपित किया गया।

चन्द्रमा पर पहुँचकर क्या काम करेगा

चन्द्रयान 2 :- पहिएदार रोवर चन्द्रमा की सतह पर चलेगा तथा वहीं पर विश्लेषण के लिए मिट्टी या चट्टान के नमूनों को एकत्र करेगा। आंकड़ों को चंद्रयान-2 कक्षयान के माध्यम से पृथ्वी पर भेजा जायेगा। ऑर्बिटर चंद्रमा की सतह से 100 किलोमीटर की दूरी पर उसका चक्कर लगाएगा, जबकि लैंडर (विक्रम) चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर आसानी से उतरेगा और रोवर (प्रज्ञान) अपनी जगह पर प्रयोग करेगा।

दक्षिणी ध्रुव क्यों?

इसरो के अनुसार, चंद्र सतह क्षेत्र जो छाया में रहता है, उत्तरी ध्रुव की तुलना में दक्षिण ध्रुव पर बहुत बड़ा है। नासा के पूर्व अंतरिक्ष यात्री डोनाल्ड ए थॉमस के अनुसार, कुछ गड्ढों में बर्फ हो सकती है जो स्थायी रूप से छाया हुआ है। chandrayan 2 aim का उद्देश्य  बर्फ से हम पानी निकाल सकते हैं।

इसरो के बारे में समस्त जानकारी


चन्द्रयान के प्रमुख तथ्य (chandrayaan 2 information) :-

  • चंद्रयान -2 में तीन घटक होते हैं: ऑर्बिटर, लैंडर (विक्रम) और रोवर (प्रज्ञान) ।
  • चंद्रयान 2 के लैंडर का नाम भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक डॉ. विक्रम ए साराभाई के नाम पर रखा गया है ।
  • इसका एल्गोरिथ्म भारत के वैज्ञानिक समुदाय द्वारा पूरी तरह से विकसित किया गया है।
  • चंद्रमा की सतह का अध्ययन करने के अलावा, उपग्रह के बाहरी वातावरण की भी जांच करेगा।
  • इसकी Dual Frequency Synthetic Aperture Radar (DFSAR) ध्रुवीय क्षेत्रों में पानी-बर्फ के मात्रात्मक आकलन को मापेगा।
  • इसका Dual Frequency Synthetic Aperture Radar (DFSAR) प्रयोग लूनर आयनमंडल में इलेक्ट्रॉन घनत्व के अस्थायी विकास का अध्ययन करेगा।
  • यह अवरक्त स्पेक्ट्रोस्कोपी, सिंथेटिक एपर्चर रेडियोमेट्री और पोलिमेट्री के साथ-साथ बड़े पैमाने पर स्पेक्ट्रोस्कोपी तकनीक का उपयोग करके पानी के अणु वितरण का अध्ययन करेगा।
  • चंद्रयान -2 मिशन महत्वाकांक्षी गगनयान परियोजना का अग्रदूत है , जिसका लक्ष्य 2022 तक भारतीयों को अंतरिक्ष में रखना है।

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